अखिलेश्वर तिवारी
जनपद में संचालित साइबर अपराध के गैंग के विरुद्ध बलरामपुर पुलिस ने गुरुवार को हॉटस्पॉट पर कार्यवाही करते हुए साइबर ठगी करने वाले सक्रिय गैंग का भंडाफोड करते हुए एक बड़े साइबर अपराध के संगठित गिरोह के 02 शातिर साइबर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है । अभियुक्तों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त एन्ड्राइड मोबाइल व फर्जी दस्तावेज भी बरामद किया गया है ।
जानकारी के अनुसार 9 अप्रैल को पुलिस अधीक्षक विकास कुमार द्वारा जनपद बलरामपुर में साइबर अपराध से सम्बन्धित हॉटस्पॉट के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने हेतु दिये गये सख्त निर्देश के क्रम में अपर पुलिस अधीक्षक नोडल अधिकारी साइबर क्राइम विशाल पाण्डेय व पर्यवेक्षण अधिकारी साइबर क्राइम क्षेत्राधिकारी तुलसीपुर अपराध डॉ जितेन्द्र कुमार के निकट पर्यवेक्षण में थानाध्यक्ष सत्येन्द्र वर्मा थाना सादुल्लानगर जनपद बलरामपुर के नेतृत्व में विभिन्न धाराओं सहित आईटी एक्ट के बावत अभियुक्तों द्वारा संगठित तरीके से साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित करने, लोगो को Logistics लाजिस्टिक ट्रांसपोटेशन माल ढुलाई (गुड्स कैरियर) के नाम पर फर्जी पहचान के माध्यम से लोगों का विश्वास जीतकर साइबर ठगी कर विभिन्न बैंको में अलग अलग बैंक खाते खुलवाकर उसमें साइबर ठगी की धनराशि मंगवाते थे तथा ठगी की धनराशि को चेक व एटीएम के माध्यम से निकालकर दूसरे बैंक खातों में जमा कर सेटलमेन्ट करते थे जिससे बैंक खाता में ठगी की धनराशि को होल्ड न हो सके। अभियोग से सम्बन्धि 02 अभियुक्तों देवा तिवारी पुत्र अनूप कुमार तिवारी निवासी भगवड़ा देवरिया इनायत थाना सादुल्लानगर जनपद बलरामपुर तथा दीपक कुमार शुक्ला पुत्र स्व0 श्याम मूरत शुक्ला मधुपुर मनकापुर थाना मनकापुर जनपद गोण्डा को संकटा चौराहा सादुल्लानगर के पास से गिरफ्तार कर विधिक कार्यवाही कर न्यायालय भेजा गया ।
अपराध करने का तरीका
अभियुक्त संगठित तरीके से साइबर ठगी करने वाले एक संचालित नेटवर्क के सक्रिय सदस्य हैं, जिसमें ये लोग ग्राहकों जरुरतमंदो से माल Logistics ट्रांसपोटेशन ढुलाई (गुड्स कैरियर) के नाम पर कम दरों में आकर्षित कर उनसे एडवांस के रूप में धनराशि ली जाती थी तथा लोगो का विश्वास जीतने के लिए विभिन्न फर्जी पहचान का प्रयोग किया जाता था। एडवान्स के रुप में ली जाने वाली धनराशि गिरोह के सदस्यों द्वारा खुलवाये गये विभिन्न बैंक खातों में मगवायी जाती थी तथा पैसा खाते में आते ही उसे तुरंत चेक या एटीएम के माध्यम से निकालकर गिरोह के मास्टरमाइंड द्वारा उपलब्ध कराये गये अन्य बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया जाता था, जिससे धनराशि भेजने वाले को साइबर ठगी का एहसास होने पर जब वह साइबर फ्राड की शिकायत करे तो धनराशि होल्ड न हो जाये। बैंक खाता होल्ड होने पर अभियुक्तों द्वारा बैंक खाते से सम्बन्धित सिम निकाल कर फेक दिया जाता था तथा अन्य नये बैंक खाता व सिम का प्रबन्ध साइबर फ्राड की धनराशि के सेटलमेन्ट हेतु किया जाता था। दोनो अभियुक्तों पर हरियाणा में अभियोग पंजीकृत हैं तथा दीपक कुमार शुक्ला साइबर फ्राड के प्रकरण में पूर्व में हरियाणा पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल जा चुका है। अभियुक्त दीपक कुमार शुक्ला पूर्व में कोलकाता में रह रहा था वहीं से साइबर अपराध करने वाले गिरोह के संपर्क में आया तथा वही से अपना साइबर अपराध कार्य प्रारम्भ कर दिया तथा अपने ग्रुप में देवा तिवारी को सक्रिय सदस्य के रुप में शामिल कर लिया। अभियुक्तों के पास से बरामद मोबाइल व अन्य साक्ष्य संकलन से अभी तक कुल 10 बैंक खाते प्राप्त हुए हैं, जिन पर विभिन्न राज्यों में कुल 11 साइबर से सम्बन्धित शिकायते दर्ज हैं। प्राप्त बैंक खातों में एक बैंक खाते का विवरण प्राप्त किया गया है जिसमें अभियुक्तगणों द्वारा लगभग 16 लाख रुपये का लेनदेन किया गया है शेष बैंक खातों का विवरण प्राप्त होना शेष है। गिरफ्तार अनावरण कर्ता टीम में थाना सादुल्लानगर के उ0नि0 सत्येन्द्र वर्मा (थानाध्यक्ष), व0उ0नि0 सुरेंद्र प्रताप सिंह, का0 ओम प्रकाश यादव, का0 उदयराज व का0 मुरारीलाल तथा तकनीकी सहयोग साइबर सर्विलांस उ0नि0 आशुतोष उपाध्याय, उ0नि0 प्रभात कुमार, का0 अनिल कुमार, का0 अखिलेश कुमार, का0 पंकज कुमार, का0 दिलीप कुमार, का0 शिवसागर व का0 श्याम जी शुक्ला शामिल थे ।
साइबर अपराध से बचाव हेतु सुझाव
ठगी का शिकार होने पर अपने नजदीकी थाने की साइबर सेल पर तत्काल संपर्क करें अथवा भारत सरकार द्वारा जारी नंबर 1930 पर कॉल करें। किसी भी प्रकार के साइबर क्राइम से सम्बन्धित आनलाइन शिकायत भारत सरकार द्वारा जारी अनलाइन नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in के माध्यम से करें।
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