अखिलेश्वर तिवारी
चरित्र निर्माण में हमारे स्वभाव (आंतरिक प्रकृति) और व्यवहार (बाहरी क्रियाकलाप) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। स्वभाव से मिले गुण हमें नींव प्रदान करते हैं, जबकि हमारा दैनिक व्यवहार और आचरण उस नींव पर एक मजबूत और सम्मानित व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
51 वीं बटालियन के तत्वावधान में जवाहर नवोदय विद्यालय में चल रहे दस दिवसीय संयुक्त वार्षिक प्रशिक्षण शिविर के छठवें दिन आयोजित कार्यक्रम के दौरान बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल अरविंद प्रताप सिंह पटवाल ने कैडेटों के निरीक्षण पर कही। उन्होंने कहा कि स्वभाव किसी व्यक्ति की जन्मजात प्रवृत्ति या प्रकृति होती है, जैसे—शांत रहना, भावुक होना, या साहसी होना。 हालाँकि स्वभाव में बदलाव करना थोड़ा कठिन होता है, लेकिन आत्म-नियंत्रण और सकारात्मक सोच के माध्यम से इसके नकारात्मक पहलुओं को सुधारा जा सकता है। वहीं आपका व्यवहार समाज और स्वयं के प्रति आपके कार्यों को दर्शाता है ।
जब आप अपने स्वभाव में धैर्य, करुणा और सहानुभूति जैसे गुणों को शामिल करते हैं, तो आपका व्यवहार समाज में एक आदर्श बन जाता है। इसके पूर्व दिन की शुरुआत योगाभ्यास और पी टी ड्रिल से हुई। इसके बाद एन सी सी सर्टिफिकेट कोर्स से संबंधित परीक्षाओं के लिए नियमित कक्षाएं भी संचालित हुई। इस अवसर पर एडम ऑफिसर कर्नल अनुराग गंजवार, एन सी सी अधिकारी मेजर आरिफ खान,लेफ्टिनेंट उदयभान, लईक अंसारी, अतुल यादव, सीटीओ वंदना पाण्डेय, सूबेदार मेजर बिनय घोष, सूबेदार नंद सिंह, बीएचएम रजनीश सहित कई पी आई स्टाफ मौजूद रहे।
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